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एक खत मेरे बेटे के नाम

प्यारे बेटे अथर्व... माय लव... मेरी जान हो तुम। तुम जब से मेरे जीवन में आए हो, दुनिया की सारी मासूमियत मैने तुममे देखी है, तुम में मैं खुद को भी देखती हूँ और तुम्हारे पापा को भी। मैं एक अच्छी माँ हूँ या नहीं पता नहीं लेकिन तुम्हारे पापा एक अच्छे पापा हैं और हमेशा रहेंगे इतना जरूर कह सकती हूँ। क्योंकि वो एक अच्छा बेटा है तो अच्छा बाप भी बनेगा। मुझे नहीं पता मैं कब तक हूँ इस दुनिया में। शायद हमेशा रहूंगी तुम्हारे साथ, हर कदम, हर पल... तब तक तुम्हे कलेजे से लगा कर रखना चाहती हूँ जब तक तुम अपने पैरों पर खड़े न हो जाओ, अपने जीवन के फैसले खुद लेने लायक न हो जाओ। अभी मेरे दिल में जो है वो लिखती जा रही हूँ। ये खत इसीलिए भी लिख रही हूँ की कई सालों बाद जब मेरा नाम तुम गूगल पर सर्च करो तो अपनी मां का ये खत तुम्हे मिले और तुम ये जान सको कि तुम्हारी मां तुम्हे कितना प्यार करती है। काश मेरी मां ने भी मेरे लिए अपनी डायरी में कुछ लिखा होता, काश मुझे ये मालूम चल पाता कि क्या वो मुझे चाहती थी या नहीं। वो मुझे क्यों छोड़ कर चली गई ये टीस मेरे मन में हमेशा रही। वो नहीं है इस बाद का मलाल पूरी जिंदगी मुझे रह...