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बदलती परिस्तिथियाँ और ग्रामीण हालात

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गांधी जी ने गांव को भारत की आत्मा कहा है। इन गाँवो से ही भारतीय संस्कृति की पहचान है। गांव का रहन सहन और वातावरण ही असल में भारत है। गांव का पहनावा और गाये जाने वाले लोकगीत भारतीय संस्कृति की कहानी कहते है। लेकिन जैसे जैसे समय बदला वैसे वैसे सभ्यता भी बदलती गयी। अब गांव केवल पिछड़ा हुआ क्षेत्र बनकर रह गए है और नगर महानगर में बदलने लगे है। जहाँ शहरों में हज़ारो स्कूल कॉलेज है वही गांव का भविष्य एक सरकारी स्कूल पर टिका हुआ है और कई जगह तो सरकारी स्कूल भी नही है। बच्चे मिलो दूर जाते है चाहे बारिश हो या कोहरा हो, सड़क हो या कीचड हो हर परिस्तिथि में बच्चों को स्कूल पहुचने में परेशानी होती है। जहाँ शहरों में नए नए हाइवे और नेशनल हाइवे बनाये जा रहे है वही गांव में अभी भी सड़के कच्ची है और जहा पक्की है वे भी मक्कारी से उखड़ी हुई और गड्ढो से भरी हुई है। विकास कार्य उस वक्त तेज़ होते है जब चुनाव समीप होते है  बाकि समय में विकास की गति धीमी बनी रहती है अब तो ग्रामीण पंचायती राज व्यवस्था में भी आरक्षण लागू कर दिया गया है की महिला एसटी या पुरुष एससी उम्मीदवार होने बाकि वर्ग के व्यक्ति चुनाव नही लड़ सक...

बेरोजगार है हम....

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हम भारत के नौजवान है।हमसे ही बनता है भारत का युवा समुदाय। हमारे पास इंजीनियर कम्प्यूटर वाणिज्य मैनेजमेंट आर्ट्स आदि सभी डिग्रीया है। लेकिन हमारी ये योग्यता की पोथी फाइ...

क्या gst को सकारात्मक ले सकते है??

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1 जुलाई 2017 को भारत सरकार की ओर से gst ( goods and service tax) लागू किया गया। gst के आते ही देश भर में भिन्न भिन्न आलोचनाएं शुरू हो गयी। यहाँ तक की वेे लोग भी इस आलोचना में शामिल हो गए जिन्हें gst के मायने ही नह...

जाति आरक्षण की आड़ में नासमझों की बढ़ती फौज

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भारत सरकार द्वारा 67 साल पहले निम्न जाति के साथ हो रहे कथित भेदभाव को लेकर जाति आरक्षण व्यवस्था लागु की गयी। उस समय सरकार का ध्यान सिर्फ इस ओर था की निम्न वर्ग के साथ उनकी जाति ...

किसान आंदोलन

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इस समय मध्यप्रदेश किसान आंदोलन को लेकर चर्चा में है। 1 जून को महाराष्ट्र में शुरू हुए इस आंदोलन ने अगले दिन ही मध्यप्रदेश में तूल पकड़ लिया। मप्र के किसान विगत दो वर्ष से पड़ र...

समझोता

बालकनी में सुबह की हल्की हल्की धूप आ रही थी। अनुराधा जी कुर्सी पर बैठी चाय पी रही थी और उनके पति साथ बैठकर चाय के साथ अख़बार पढ़ रहे थे। उनका बेटा और बहु दोनों अपने अपने टिफिन ले ...

इच्छा

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अनु अपने कमरे में बैठी घुटनो पर सर रखकर रोये जा रही थी।लेकिन वहाँ कोई नही था जो आकर उसके आँसू पोंछे या उसे दुलार कर चुप करा दे।क्योंकि यह उसका बचपन नही था जो उसकी माँ उसे गोद में लेकर चुप करा देती या उसके बाबा उसे कंधे पर बिठाकर घुमाने ले जाते। यह तो एक ऐसा पड़ाव था जहाँ अनु अठारह साल की हो गयी थी और कल ही उसे देखने वाले आये थे उसके बाबा ने उसका रिश्ता पक्का कर दिया था।अब कुछ ही दिनों में अनु अपने घर से परायी हो जायेगी। थोड़ी देर यूं ही सुबकती रही फिर जाने क्या सोच कर रसोई की तरफ गयी जहाँ उसकी माँ खाना पकाते हुए फोन पर सभी रिश्तेदारो को यह खुशखबरी दे रही थी की अनु की शादी पक्की हो गयी है। माँ के फुरसत होने पर अनु ने हिम्मत जुटाकर कहा- माँ मेरी शादी की इतनी जल्दी क्यों पड़ी है अभी तो मैंने 12वी ही पास की है।क्या मैं कॉलेज नही जाउंगी ?? मेरा सपना कैसे पूरा होगा? मैं पीएससी की परीक्षा नही दूंगी क्या?? बाबा ने मुझे बचपन से यही सपना दिखाया था न की मै बड़ी होकर अधिकारी बनूंगी। तो फिर बाबा मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे है?? अनु एक साँस में सब कहती चली गयी और जब चुप हुई तो उसकी माँ बोली - तुझे घर की...