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समाज के साथ बदलती वर्ण व्यवस्था

वैदिक काल से ही समाज 4 वर्णों  में विभाजित था : ब्राह्मण, राजन्य या क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र | • प्रत्येक वर्ण का अपना कार्य निर्धारित था जिसे वे पूरे रीति रिवाज के साथ करते थे | ...

वृद्धाश्रम की आवश्यकता क्यों??

आजकल देखा जाये तो हर दूसरे शहर में एक वृद्धाश्रम होता है। जिस तरह बाल आश्रम जरुरत मंद बच्चों को पनाह देता है वैसे ही वृद्धाश्रम घर से निकले गए असहाय वृद्ध जनों को पनाह देता ...

अधधविश्वास में अंधे हुए लोग

इन दिनों किसी ने बहुत खूब कहा है की "रेप होने पर मोमबत्तिया जलाते है और रेप का आरोपी पकड़ा गया तो शहर के शहर जला दिए"। लेकिन ऐसा क्यों?? कुछ दिन पहले 70 बच्चों की मौत हो गयी थी उस पर लो...

इस 15 अगस्त युवाओ को एक बेहतर सन्देश

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हर साल 15 अगस्त की तारीख हमारे लिए यह मायने रखती है की इस दिन हमारा देश आजाद हुआ था, भारत को अंग्रेज़ो की गुलामी से आजादी मिली थी। इस स्वतंत्रता दिवस मै देश के युवाओ से एक प्रश्न क...

मेरी डायरी का एक अंश

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रोज सुबह एक बिल्ली का बच्चा फ्रिज़ के बाजु में आकर बैठ जाता है। जब मै फ्रिज़ से कुछ लेने जाती हूँ तो वो मासूम चेहरा आशा भरी नज़रो से मेरी तरफ देखता है तब मैं सब से छुप कर थोडा सा दूध...

बदलती परिस्तिथियाँ और ग्रामीण हालात

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गांधी जी ने गांव को भारत की आत्मा कहा है। इन गाँवो से ही भारतीय संस्कृति की पहचान है। गांव का रहन सहन और वातावरण ही असल में भारत है। गांव का पहनावा और गाये जाने वाले लोकगीत भारतीय संस्कृति की कहानी कहते है। लेकिन जैसे जैसे समय बदला वैसे वैसे सभ्यता भी बदलती गयी। अब गांव केवल पिछड़ा हुआ क्षेत्र बनकर रह गए है और नगर महानगर में बदलने लगे है। जहाँ शहरों में हज़ारो स्कूल कॉलेज है वही गांव का भविष्य एक सरकारी स्कूल पर टिका हुआ है और कई जगह तो सरकारी स्कूल भी नही है। बच्चे मिलो दूर जाते है चाहे बारिश हो या कोहरा हो, सड़क हो या कीचड हो हर परिस्तिथि में बच्चों को स्कूल पहुचने में परेशानी होती है। जहाँ शहरों में नए नए हाइवे और नेशनल हाइवे बनाये जा रहे है वही गांव में अभी भी सड़के कच्ची है और जहा पक्की है वे भी मक्कारी से उखड़ी हुई और गड्ढो से भरी हुई है। विकास कार्य उस वक्त तेज़ होते है जब चुनाव समीप होते है  बाकि समय में विकास की गति धीमी बनी रहती है अब तो ग्रामीण पंचायती राज व्यवस्था में भी आरक्षण लागू कर दिया गया है की महिला एसटी या पुरुष एससी उम्मीदवार होने बाकि वर्ग के व्यक्ति चुनाव नही लड़ सक...

बेरोजगार है हम....

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हम भारत के नौजवान है।हमसे ही बनता है भारत का युवा समुदाय। हमारे पास इंजीनियर कम्प्यूटर वाणिज्य मैनेजमेंट आर्ट्स आदि सभी डिग्रीया है। लेकिन हमारी ये योग्यता की पोथी फाइ...