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भारत में बढ़ती भेड़ियों की संख्या

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हमारा भारत जो संस्कृति और सभ्यता का परिचायक है उस देश में पापी भेड़ियो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।इन लोगों के कारण भारत की संस्कृति और गौरव पर एक प्रश्न चिन्ह लग जाता है...

हाँ। ये मेरी ज़िन्दगी है जो लोगो को सरल लगती है।

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(इसे समझना हर किसी के बस की बात नही है) ये सभी तत्व उसकी जिंदगी के अभिन्न अंग है।साथ ही साथ रिश्तों के दायरे अक्सर उसको चूर चूर कर देते है।ऐसे रिश्ते जिनसे उसका वजूद हो।बिना उन रिश्तों के उस लड़की की कोई औकात न हो।वाह रे भगवान् क्या दुनिया बनाई है तूने।यहाँ चीत्कारें यदि पुरुष की हों तो आसमान भी उठा ले।लेकिन एक औरत की चीत्कार को जबान के बहार जाने की इज़ाज़त नही है।वो चीत्कार हमेशा कलेजे के अंदर दबी रहती है और आग की तरह धधकती रहती है।लेकिन जब संसार की जननी मुट्ठी भर पापियों से त्रस्ट होकर कुंठित होकर "मैं" को चुनती है तब वो चीत्कार बहार निकलती है और उस चीत्कार को दबाने का एक ही तरीका होता है कि उसके चरित्र पर ऊँगली उठा दो और उसके लिए वैश्या जैसी गाली का इस्तेमाल करो।यहाँ आकर भाई बहन, बाप बेटी जैसा रिश्ता कोई मायने नही रखता।ये रिश्ते जितने करीबी होते है उतना ही दर्द दे जाते है।फिर एक राज खुला की वो आत्महत्या क्यों करती है।वो अपना संसार बसाती है और बार बार खुद को मारती है।आखिर क्यों? वो समझ गयी क्योंकि उसंने वो महसूस कर लिया।उसने वो सब सह लिया जिसके कारण हर बार वो अपने बच्चों ...

क्या नारी सशक्तिकरण झूठ,फरेब को बढ़ावा दे रहा है।

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आज भारत जिस रफ़्तार से नारी सशक्तिकरण की ओर बढ़ रहा है ठीक उसी तरह इसका दुरूपयोग भी बढ़ता जा रहा है।आखिर क्या कारण है कि दहेज़ प्रताड़ना और बलात्कार संबंधी मामलों को सुलझाने में ...

पद्मावती पर इतना हंगामा क्यों???

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आज एक फ़िल्म पद्मावती के कारण पूरा भारत जाति विशेष में बँट गया है।आज ही सबको याद आया की कोई नारी हमारी आन बान और  शान है।जबकि रोज एक लड़की की आबरू लुटती है यहां। तो फिर क्यों लो...

जीकर देखो एक पीड़िता की ज़िन्दगी

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कभी कभी सोचती हूँ कि मैं खुशनसीब हूँ जो मेरे साथ बलात्कार नही हुआ।मुझे लोग पीड़िता नही कहते।मीडिया वाले मेरे मुँह में माइक घुसेड़ कर मेरा चेहरा धुंधला कर मुझसे ये नही पूछते की क्या हुआ था।मैं वो नही हूँ जिसके परिवार को सालों तक कोर्ट के चक्कर काटने है।वो डॉक्टर मुझे शक की निगाहों से नही देखता कि कहीं सहमति से तो नही हुआ।मैं वो नही हूँ जिसे महिला पुलिसकर्मी के आभाव में पुलिस वाले के सवालों का जबाब देने में असमंजस होता है।सोचती हूँ अच्छा है,मुझे देख मोहल्ले के लोग कानाफूसी नही करते।मेरे घरवाले मुझे कोसते नही कि - तू पैदा ही क्यों हुई थी। हाँ.. मैं वो नही हूँ, लेकिन वो हज़ारों लडकिया जिनके साथ बलात्कार हुआ उन्हें ये सब सहना पड़ता है।उन बलात्कारियो से मैं कहना चाहती हूँ कि एक बार जीकर देखो एक पीड़िता की ज़िन्दगी।एक बार महसूस करो उस परिवार का दर्द और उस बेटी का दर्द। भारत में प्रतिदिन 85 बलात्कार होते है और एक साल में संख्या कई हज़ारो की होती है जिनमे कई लडकिया जिन्हें या तो मार दिया जाता है या फिर वे खुद आत्महत्या कर लेती है।बाकी बची लडकिया जिल्लत भरी ज़िन्दगी जीती है।बहुत कम लडकिया ऐसी है जो वा...

बस थोडा सा त्याग और थोड़ी सी मिलनसारिता।

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आज कल सोशल मिडिया पर जहाँ देखो वहा आरक्षण विरोधी गला फाड़ फाड़ कर आरक्षण का विरोध कर रहे है।वे चाहते है की भारत आरक्षण मुक्त हो जाय।भारत का संविधान लागू होने से लेकर अब तक आरक्षण हर जगह व्याप्त है।लेकिन आरक्षण मिलता भी है तो केवल जातिगत बुनियाद पर।क्या ये जरूरी है की जिन्हें आरक्षण मिल रहा है वे योग्य है या वे गरीब है।अपितु आर्थिक रूप से सुदृण तो दलित भी है।आज क्या नही है आरक्षण प्राप्त लोगो के पास उनके पास घर है नोकरी है बच्चे अच्छे स्कूल कॉलेजों में पढ़ रहे है और क्या चाहिए।रहा सहा उन्हें मंदिरो में पुजारी बनना था तो वो भी बन गए लेकिन केवल भेदभाव की बुनियाद पर।पुजारी के रूप में एक दलित का स्थापित होना भेदभाव को वही ख़त्म कर देता है तो क्या अब आरक्षण बन्द कर देना चाहिए।हर एक सवर्ण यही चाहता है।लेकिन क्या किसी ने सोचा है की जिस प्रकार आरक्षण हटाना हमारा स्वार्थ है उसी प्रकार आरक्षण प्राप्त करना उन लोगो का स्वार्थ है।सरकार आरक्षण क्यों नही हटाती है?? वो इसीलिए नही  क्योकि दलितों के द्वारा प्राप्त होने वाले वोट कम हो जायेगे।बल्कि जो योग्य व्यक्ति सत्ता को अपने हाथ में लिए बैठा है उसे भार...

भारत में घटता शिक्षा का स्तर

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देखा जाए तो उच्चतर शिक्षा व्यवस्था के मामले में अमरीका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर भारत का नाम आता है। लेकिन जहाँ तक गुणवत्ता की बात है दुनिया के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों मे...